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वो अधूरी सी तारीफ, वो अधूरी सी बातें,
वो दूर की एक झलक, वो ख्वाबों से भरी रातें।
कुछ टूटा तो तेरे दिल में भी होगा,
जब अनकही बातें अनकही ही रह गई;
कमी तुझको भी मेरी खलती तो होगी,
जब तुझ में किसी को उसका जहान नहीं दिखता होगा;
ये जो घर है मेरा, सब कहते हैं— ये किसी पराए का है; इसकी दीवारें किसी और की, छत भी किसी और की, ये घर बस किराए का है! पर इसकी चाबी, कुछ वक़्त ...
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